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भगवान जगन्नाथ का चमत्कार 😳 | भक्त के नीम रस से ठीक हुआ रोग |#shorts #facts #jagannath

By Daiveey · more summaries from this channel

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Summary

भगवान जगन्नाथ को भक्तों के प्रेमवश प्रतिदिन कई प्रकार के प्रसाद ग्रहण करने से पेट दर्द हो गया, जिसे एक वृद्धा भक्त ने नीम का रस पिलाकर ठीक किया, जिससे आज भी प्रसाद के बाद नीम का रस चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।

Key Points

  • भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों के प्रेम से दिए गए 100 प्रकार के प्रसाद को प्रतिदिन ग्रहण करते थे। 
  • प्रतिदिन कई प्रकार के भोजन करने के कारण भगवान जगन्नाथ को भयंकर पेट दर्द हो गया। 
  • पेट दर्द से पीड़ित भगवान जगन्नाथ एक वृद्धा भक्त के सपने में आए और उनसे नीम के पत्तों का रस लाने को कहा। 
  • वृद्धा भक्त ने नीम का रस बनाकर मंदिर ले गई, लेकिन पहरेदारों ने उसे फेंक दिया और उसे अपमानित करके घर भेज दिया। 
  • उसी रात भगवान जगन्नाथ राज्य के राजा के सपने में प्रकट हुए और उन्हें अपने पेट दर्द तथा वृद्धा भक्त के अपमान के बारे में बताया। 
  • राजा तुरंत जागकर वृद्धा के घर गए, उसे सांत्वना दी और फिर से नीम का रस बनवाकर उसी वृद्धा के हाथों से भगवान को अर्पित करवाया। 
  • नीम का रस ग्रहण करने के बाद भगवान जगन्नाथ का पेट दर्द पूरी तरह ठीक हो गया। 
  • तभी से आज तक भगवान जगन्नाथ को प्रसाद चढ़ाने के बाद नीम का रस भी अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है। 
  • यह घटना दर्शाती है कि सच्चा प्रेम हो तो भगवान किसी से भी मदद मांग सकते हैं। 
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भगवान जगन्नाथ का चमत्कार 😳 | भक्त के नीम रस से ठीक हुआ रोग |#shorts #facts #jagannath

भगवान जगन्नाथ का चमत्कार 😳 | भक्त के नीम रस से ठीक हुआ रोग |#shorts #facts #jagannath

भगवान जगन्नाथ को भक्तों के प्रेमवश प्रतिदिन कई प्रकार के प्रसाद ग्रहण करने से पेट दर्द हो गया, जिसे एक वृद्धा भक्त ने नीम का रस पिलाकर ठीक किया, जिससे आज भी प्रसाद के बाद नीम का रस चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।

Key Points

भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों के प्रेम से दिए गए 100 प्रकार के प्रसाद को प्रतिदिन ग्रहण करते थे।
प्रतिदिन कई प्रकार के भोजन करने के कारण भगवान जगन्नाथ को भयंकर पेट दर्द हो गया।
पेट दर्द से पीड़ित भगवान जगन्नाथ एक वृद्धा भक्त के सपने में आए और उनसे नीम के पत्तों का रस लाने को कहा।
वृद्धा भक्त ने नीम का रस बनाकर मंदिर ले गई, लेकिन पहरेदारों ने उसे फेंक दिया और उसे अपमानित करके घर भेज दिया।
उसी रात भगवान जगन्नाथ राज्य के राजा के सपने में प्रकट हुए और उन्हें अपने पेट दर्द तथा वृद्धा भक्त के अपमान के बारे में बताया।
राजा तुरंत जागकर वृद्धा के घर गए, उसे सांत्वना दी और फिर से नीम का रस बनवाकर उसी वृद्धा के हाथों से भगवान को अर्पित करवाया।
नीम का रस ग्रहण करने के बाद भगवान जगन्नाथ का पेट दर्द पूरी तरह ठीक हो गया।
तभी से आज तक भगवान जगन्नाथ को प्रसाद चढ़ाने के बाद नीम का रस भी अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है।
यह घटना दर्शाती है कि सच्चा प्रेम हो तो भगवान किसी से भी मदद मांग सकते हैं।
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