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Carbohydrates part 2 : Isomerism (English) | Isomer | Epimer | Anomer | Diastereomer | Stereoisomer

By snigdha goswami · more summaries from this channel

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Summary

यह वीडियो मोनोसैकेराइड्स में विभिन्न प्रकार की समावयवता, विशेष रूप से संरचनात्मक और त्रिविम समावयवता (प्रकाशिक समावयवता, एनेंटियोमर, डायस्टीरियोमर, एपिमर और एनोमर) को उनके आणविक सूत्र समान होने के बावजूद संरचनात्मक भिन्नता के आधार पर समझाता है।

Key Points

  • मोनोसैकेराइड्स जैसे ग्लूकोज, फ्रुक्टोज और गैलेक्टोज का आणविक सूत्र (C6H12O6) समान होता है, लेकिन उनकी संरचना और गुण भिन्न होते हैं, जिसे समावयवता कहते हैं। 
  • समावयवता मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है: संरचनात्मक समावयवता, त्रिविम समावयवता (स्टीरियोआइसोमेरिज्म) और संरूपण समावयवता (कन्फर्मेशनल आइसोमेरिज्म)। 
  • संरचनात्मक समावयवता में अणु का आणविक सूत्र समान होता है, लेकिन परमाणुओं के बंधन की व्यवस्था भिन्न होती है, जैसे ग्लूकोज और फ्रुक्टोज। 
  • त्रिविम समावयवता में अणु का आणविक सूत्र और परमाणुओं के बंधन की व्यवस्था समान होती है, लेकिन परमाणुओं की स्थानिक व्यवस्था भिन्न होती है, जिसमें प्रकाशिक समावयवता एक महत्वपूर्ण प्रकार है। 
  • प्रकाशिक समावयवता में अणु समतल-ध्रुवित प्रकाश के तल को घुमाते हैं; जो दक्षिणावर्त घुमाते हैं वे डेक्सट्रोरोटेटरी (+) और जो वामावर्त घुमाते हैं वे लेवोरोटेटरी (-) कहलाते हैं। 
  • एनेंटियोमर वे त्रिविम समावयवी होते हैं जो एक-दूसरे के अध्यारोपित न होने वाले दर्पण प्रतिबिंब होते हैं, जैसे D-ग्लूकोज और L-ग्लूकोज। 
  • डायस्टीरियोमर वे त्रिविम समावयवी होते हैं जो एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब नहीं होते हैं; एपिमर डायस्टीरियोमर का एक विशेष प्रकार है जो केवल एक काइरल कार्बन पर विन्यास में भिन्न होते हैं (जैसे D-ग्लूकोज और D-गैलेक्टोज C4 एपिमर हैं)। 
  • एनोमर एपिमर का एक विशेष प्रकार है जो चक्रीय संरचना में एनोमेरिक कार्बन (एल्डोज में C1 और कीटोज में C2) पर विन्यास में भिन्न होते हैं, जैसे अल्फा-ग्लूकोज और बीटा-ग्लूकोज। 
  • एनोमेरिक कार्बन पर हाइड्रॉक्सिल समूह की स्थिति (अल्फा या बीटा) डाइसैकेराइड और पॉलीसैकेराइड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 
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Carbohydrates part 2 : Isomerism (English) | Isomer | Epimer | Anomer | Diastereomer | Stereoisomer

यह वीडियो मोनोसैकेराइड्स में विभिन्न प्रकार की समावयवता, विशेष रूप से संरचनात्मक और त्रिविम समावयवता (प्रकाशिक समावयवता, एनेंटियोमर, डायस्टीरियोमर, एपिमर और एनोमर) को उनके आणविक सूत्र समान होने के बावजूद संरचनात्मक भिन्नता के आधार पर समझाता है।

Key Points

मोनोसैकेराइड्स जैसे ग्लूकोज, फ्रुक्टोज और गैलेक्टोज का आणविक सूत्र (C6H12O6) समान होता है, लेकिन उनकी संरचना और गुण भिन्न होते हैं, जिसे समावयवता कहते हैं।
समावयवता मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है: संरचनात्मक समावयवता, त्रिविम समावयवता (स्टीरियोआइसोमेरिज्म) और संरूपण समावयवता (कन्फर्मेशनल आइसोमेरिज्म)।
संरचनात्मक समावयवता में अणु का आणविक सूत्र समान होता है, लेकिन परमाणुओं के बंधन की व्यवस्था भिन्न होती है, जैसे ग्लूकोज और फ्रुक्टोज।
त्रिविम समावयवता में अणु का आणविक सूत्र और परमाणुओं के बंधन की व्यवस्था समान होती है, लेकिन परमाणुओं की स्थानिक व्यवस्था भिन्न होती है, जिसमें प्रकाशिक समावयवता एक महत्वपूर्ण प्रकार है।
प्रकाशिक समावयवता में अणु समतल-ध्रुवित प्रकाश के तल को घुमाते हैं; जो दक्षिणावर्त घुमाते हैं वे डेक्सट्रोरोटेटरी (+) और जो वामावर्त घुमाते हैं वे लेवोरोटेटरी (-) कहलाते हैं।
एनेंटियोमर वे त्रिविम समावयवी होते हैं जो एक-दूसरे के अध्यारोपित न होने वाले दर्पण प्रतिबिंब होते हैं, जैसे D-ग्लूकोज और L-ग्लूकोज।
डायस्टीरियोमर वे त्रिविम समावयवी होते हैं जो एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब नहीं होते हैं; एपिमर डायस्टीरियोमर का एक विशेष प्रकार है जो केवल एक काइरल कार्बन पर विन्यास में भिन्न होते हैं (जैसे D-ग्लूकोज और D-गैलेक्टोज C4 एपिमर हैं)।
एनोमर एपिमर का एक विशेष प्रकार है जो चक्रीय संरचना में एनोमेरिक कार्बन (एल्डोज में C1 और कीटोज में C2) पर विन्यास में भिन्न होते हैं, जैसे अल्फा-ग्लूकोज और बीटा-ग्लूकोज।
एनोमेरिक कार्बन पर हाइड्रॉक्सिल समूह की स्थिति (अल्फा या बीटा) डाइसैकेराइड और पॉलीसैकेराइड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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