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Mata Baglamukhi Sadhna | माता बगलामुखी सिद्धि साधना | #baglamukhisadhna

By DΛIVIK ƧΉΛKƬIYΛ · more summaries from this channel

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Summary

यह वीडियो शात संप्रदाय में बगलामुखी महाविद्या की महत्त्व, शक्ति और विस्तृत तंत्र साधना विधि को समझाता है।

Key Points

  • बगलामुखी शात संप्रदाय की दस महाविद्याओं में से अष्टम महाविद्या है और उसे ब्रह्मास्त्र, शस्त्र आदि कई नामों से जाना जाता है। 
  • बगलामुखी की पूजा से शत्रु विनाश, रोग निवारण, धन‑सम्पदा, युद्ध‑विवाद में विजय और इच्छित कामनाओं की पूर्ति संभव होती है। 
  • बगलामुखी का मंत्र सिद्ध करने के बाद केवल मातृ स्मरण से ही प्रचंड पवन भी स्थिर हो जाता है, जिससे शत्रु और अनिष्ट चाहने वाले स्वतः शमन हो जाते हैं। 
  • बगलामुखी को पीतांबरा कहा जाता है; इसलिए उसकी साधना में पीले वस्त्र, पीले फूल और पीले रंग का विशेष महत्व है। 
  • साधना के तीन मुख्य नियम हैं: पीले वस्त्र धारण करना, ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना और दिन में एक बार ही भोजन करना। 
  • साधना का प्रारम्भ रात्रि 10 बजे के बाद किया जाता है; साधक को पश्चिम या दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पीले आसन पर बैठना, बगलामुखी की प्रतिमा, यंत्र और गणपति‑भैरव के प्रतीक स्थापित करना आवश्यक है। 
  • पहले दिन जल लेकर संकल्प लेना, फिर शुद्ध घी का दीपक, धूप‑अगरबत्ती, गुरु पूजन और विभिन्न मंत्रों (ओम् वक्रतुंडाय, ओम् मृत्युंजय भैरवाय आदि) का क्रमबद्ध जाप करना अनिवार्य है। 
  • मुख्य मंत्रों को 21 या 51 माला तक दोहराया जाता है; विशेष रूप से बगलामुखी मूल मंत्र (ओम् हलीम् बगलामुखी सर्व दुष्टा नाम ...) का 51 माला जाप किया जाता है। 
  • साधना के 21 दिनों के बाद बगलामुखी यंत्र और माला को जल में विसर्जित किया जाता है, और प्रत्येक साधना से पहले‑बाद तांत्रिक गुरु कवच का पाँच‑पाँच बार पाठ करना अनिवार्य बताया गया है। 
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Mata Baglamukhi Sadhna | माता बगलामुखी सिद्धि साधना | #baglamukhisadhna

Mata Baglamukhi Sadhna | माता बगलामुखी सिद्धि साधना | #baglamukhisadhna

यह वीडियो शात संप्रदाय में बगलामुखी महाविद्या की महत्त्व, शक्ति और विस्तृत तंत्र साधना विधि को समझाता है।

Key Points

बगलामुखी शात संप्रदाय की दस महाविद्याओं में से अष्टम महाविद्या है और उसे ब्रह्मास्त्र, शस्त्र आदि कई नामों से जाना जाता है।
बगलामुखी की पूजा से शत्रु विनाश, रोग निवारण, धन‑सम्पदा, युद्ध‑विवाद में विजय और इच्छित कामनाओं की पूर्ति संभव होती है।
बगलामुखी का मंत्र सिद्ध करने के बाद केवल मातृ स्मरण से ही प्रचंड पवन भी स्थिर हो जाता है, जिससे शत्रु और अनिष्ट चाहने वाले स्वतः शमन हो जाते हैं।
बगलामुखी को पीतांबरा कहा जाता है; इसलिए उसकी साधना में पीले वस्त्र, पीले फूल और पीले रंग का विशेष महत्व है।
साधना के तीन मुख्य नियम हैं: पीले वस्त्र धारण करना, ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना और दिन में एक बार ही भोजन करना।
साधना का प्रारम्भ रात्रि 10 बजे के बाद किया जाता है; साधक को पश्चिम या दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पीले आसन पर बैठना, बगलामुखी की प्रतिमा, यंत्र और गणपति‑भैरव के प्रतीक स्थापित करना आवश्यक है।
पहले दिन जल लेकर संकल्प लेना, फिर शुद्ध घी का दीपक, धूप‑अगरबत्ती, गुरु पूजन और विभिन्न मंत्रों (ओम् वक्रतुंडाय, ओम् मृत्युंजय भैरवाय आदि) का क्रमबद्ध जाप करना अनिवार्य है।
मुख्य मंत्रों को 21 या 51 माला तक दोहराया जाता है; विशेष रूप से बगलामुखी मूल मंत्र (ओम् हलीम् बगलामुखी सर्व दुष्टा नाम ...) का 51 माला जाप किया जाता है।
साधना के 21 दिनों के बाद बगलामुखी यंत्र और माला को जल में विसर्जित किया जाता है, और प्रत्येक साधना से पहले‑बाद तांत्रिक गुरु कवच का पाँच‑पाँच बार पाठ करना अनिवार्य बताया गया है।
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