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12th BIOLOGY | 8.RESPIRATION AND CIRCULATION | LECTURE 01 | Respiraton in Animals | PRADEEP GIRI SIR

By Pradeep Giri 11th and 12th Academy · more summaries from this channel

29 min video·hi··6334 views

Summary

यह वीडियो श्वसन की परिभाषा, पौधों और जानवरों में श्वसन अंगों की विविधता, और मानव श्वसन प्रणाली के विभिन्न घटकों जैसे नासिका, ग्रसनी, स्वरयंत्र, श्वासनली, ब्रोन्काई और फेफड़ों की विस्तृत जानकारी देता है।

Key Points

  • श्वसन एक जैव-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें जटिल कार्बनिक पदार्थ ऑक्सीजन की उपस्थिति में टूटकर एटीपी के रूप में ऊर्जा छोड़ते हैं। 
  • पौधों में गैसों का आदान-प्रदान विसरण प्रक्रिया द्वारा पत्तियों और युवा तनों पर मौजूद स्टोमेटा तथा पुराने तनों और छाल पर मौजूद लेंटिसेल्स के माध्यम से होता है। 
  • जानवरों में, उनके आवास और पारिस्थितिकी तंत्र के अनुसार, प्लाज्मा झिल्ली, श्वासनली, बुक लंग्स, गलफड़े और फेफड़ों जैसे विभिन्न श्वसन अंग पाए जाते हैं। 
  • मानव श्वसन प्रणाली नासिका से शुरू होती है, जो नासिका कक्ष में खुलती है, जहाँ हवा को फ़िल्टर और गर्म किया जाता है। 
  • ग्रसनी एक छोटी ऊर्ध्वाधर नली है जो नासिका कक्ष को स्वरयंत्र से जोड़ती है, जो ध्वनि उत्पन्न करने वाला अंग है। 
  • श्वासनली आगे ब्रोन्काई में विभाजित होती है, जो फिर ब्रोन्किओल्स में शाखाएं बनाती है, और अंततः छोटी वायु थैलियों, जिन्हें एल्वियोली कहते हैं, में समाप्त होती है। 
  • श्वासनली, जिसे विंडपाइप भी कहते हैं, लगभग 12 सेंटीमीटर लंबी होती है और 16 से 20 'C' आकार के उपास्थि वलयों द्वारा समर्थित होती है जो इसे ढहने से रोकते हैं। 
  • फेफड़े मुख्य श्वसन अंग हैं, जो वक्ष गुहा में स्थित होते हैं और एक फुफ्फुसीय गुहा से घिरे होते हैं जिसमें स्नेहन और यांत्रिक झटकों से सुरक्षा के लिए फुफ्फुसीय द्रव भरा होता है। 
  • दाहिने फेफड़े में तीन लोब होते हैं, जबकि बाएं फेफड़े में दो लोब होते हैं। 
  • प्रत्येक मानव फेफड़े में लगभग 750 मिलियन एल्वियोली होते हैं, जो अंगूर जैसी संरचनाएं होती हैं जिनकी दीवारें पतली, लोचदार और अत्यधिक संवहनी होती हैं, जो कुशल गैस विनिमय के लिए महत्वपूर्ण हैं। 
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12th BIOLOGY | 8.RESPIRATION AND CIRCULATION | LECTURE 01 | Respiraton in Animals | PRADEEP GIRI SIR

12th BIOLOGY | 8.RESPIRATION AND CIRCULATION | LECTURE 01 | Respiraton in Animals | PRADEEP GIRI SIR

यह वीडियो श्वसन की परिभाषा, पौधों और जानवरों में श्वसन अंगों की विविधता, और मानव श्वसन प्रणाली के विभिन्न घटकों जैसे नासिका, ग्रसनी, स्वरयंत्र, श्वासनली, ब्रोन्काई और फेफड़ों की विस्तृत जानकारी देता है।

Key Points

श्वसन एक जैव-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें जटिल कार्बनिक पदार्थ ऑक्सीजन की उपस्थिति में टूटकर एटीपी के रूप में ऊर्जा छोड़ते हैं।
पौधों में गैसों का आदान-प्रदान विसरण प्रक्रिया द्वारा पत्तियों और युवा तनों पर मौजूद स्टोमेटा तथा पुराने तनों और छाल पर मौजूद लेंटिसेल्स के माध्यम से होता है।
जानवरों में, उनके आवास और पारिस्थितिकी तंत्र के अनुसार, प्लाज्मा झिल्ली, श्वासनली, बुक लंग्स, गलफड़े और फेफड़ों जैसे विभिन्न श्वसन अंग पाए जाते हैं।
मानव श्वसन प्रणाली नासिका से शुरू होती है, जो नासिका कक्ष में खुलती है, जहाँ हवा को फ़िल्टर और गर्म किया जाता है।
ग्रसनी एक छोटी ऊर्ध्वाधर नली है जो नासिका कक्ष को स्वरयंत्र से जोड़ती है, जो ध्वनि उत्पन्न करने वाला अंग है।
श्वासनली आगे ब्रोन्काई में विभाजित होती है, जो फिर ब्रोन्किओल्स में शाखाएं बनाती है, और अंततः छोटी वायु थैलियों, जिन्हें एल्वियोली कहते हैं, में समाप्त होती है।
श्वासनली, जिसे विंडपाइप भी कहते हैं, लगभग 12 सेंटीमीटर लंबी होती है और 16 से 20 'C' आकार के उपास्थि वलयों द्वारा समर्थित होती है जो इसे ढहने से रोकते हैं।
फेफड़े मुख्य श्वसन अंग हैं, जो वक्ष गुहा में स्थित होते हैं और एक फुफ्फुसीय गुहा से घिरे होते हैं जिसमें स्नेहन और यांत्रिक झटकों से सुरक्षा के लिए फुफ्फुसीय द्रव भरा होता है।
दाहिने फेफड़े में तीन लोब होते हैं, जबकि बाएं फेफड़े में दो लोब होते हैं।
प्रत्येक मानव फेफड़े में लगभग 750 मिलियन एल्वियोली होते हैं, जो अंगूर जैसी संरचनाएं होती हैं जिनकी दीवारें पतली, लोचदार और अत्यधिक संवहनी होती हैं, जो कुशल गैस विनिमय के लिए महत्वपूर्ण हैं।
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