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गायत्री तीर्थ शान्तिकुंज हरिद्वार - एक दर्शन | Gayatri Teerth Shantikunj Haridwar -Introduction AWGP

By Shantikunjvideo-AWGP · more summaries from this channel

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Summary

शांतिकुंज, परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा हरिद्वार में स्थापित एक अद्वितीय आध्यात्मिक और वैज्ञानिक तीर्थ है, जो भारतीय संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देता है।

Key Points

  • यह केवल एक स्थान नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान, वनस्पति, धर्म और अध्यात्म का समूचा संसार है, जो प्राचीन गुरुकुल अनुशासन और विज्ञान-धर्म के समन्वय का प्रतीक है। 
  • शांतिकुंज एक जागृत योग तीर्थ है, जो भारत की महान विभूतियों की तपश्चर्या की दिव्य प्राण ऊर्जा से संबंधित एक पवित्र स्थल है, जहाँ मन, विचार और आत्मा की शांति प्राप्त होती है। 
  • परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा 1971 में हरिद्वार में स्थापित शांतिकुंज, "हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा" के सूत्रपात के साथ राष्ट्र-निर्माण और जीवन जीने की कला सिखाने का एक अनूठा केंद्र है। 
  • संस्थान के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य और उनकी अर्धांगिनी भगवती देवी शर्मा (गुरुदेव और माताजी) की सूक्ष्म उपस्थिति आज भी गायत्री परिजनों को शक्ति और संरक्षण प्रदान करती है। 
  • शांतिकुंज में यज्ञ परंपरा को वैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत किया जाता है, जहाँ यज्ञ प्रयोगशाला में मंत्र शक्ति और ऊर्जा के प्रभावों पर शोध किया जाता है, जो अध्यात्म और विज्ञान के समन्वय का प्रतीक है। 
  • गुरुदेव द्वारा 15 वर्ष की आयु में प्रज्वलित किया गया पवित्र अखंड दीप, जो 1956 से निरंतर प्रज्वलित है, विशाल गायत्री परिवार और 24 महापुरश्चरणों की आधारशिला है। 
  • गुरुदेव ने 'विचार क्रांति अभियान' का सूत्रपात किया, जिसमें उनके साहित्य को जीवंत देव प्रतिमाएँ माना गया है, जो हर मनोस्थिति के लोगों का मार्गदर्शन कर उनकी समस्याओं का समाधान करती हैं। 
  • 1979 में स्थापित ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान, विज्ञान और अध्यात्म के पूरक संबंध को स्थापित करते हुए यज्ञ विज्ञान, मंत्र शक्ति और जैव विविधता पर महत्वपूर्ण शोध करता है। 
  • देव संस्कृति विश्वविद्यालय की स्थापना 2002 में की गई, जिसका उद्देश्य केवल ज्ञानी नहीं, बल्कि उच्च चरित्रवान, कर्तव्यपरायण और मूल्यनिष्ठ छात्रों का निर्माण करना है, जो भारतीय संस्कृति के पुरातन स्वरूप को दर्शाते हैं। 
गायत्री तीर्थ शान्तिकुंज हरिद्वार - एक दर्शन | Gayatri Teerth Shantikunj Haridwar -Introduction AWGP

गायत्री तीर्थ शान्तिकुंज हरिद्वार - एक दर्शन | Gayatri Teerth Shantikunj Haridwar -Introduction AWGP

शांतिकुंज, परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा हरिद्वार में स्थापित एक अद्वितीय आध्यात्मिक और वैज्ञानिक तीर्थ है, जो भारतीय संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देता है।

Key Points

यह केवल एक स्थान नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान, वनस्पति, धर्म और अध्यात्म का समूचा संसार है, जो प्राचीन गुरुकुल अनुशासन और विज्ञान-धर्म के समन्वय का प्रतीक है।
शांतिकुंज एक जागृत योग तीर्थ है, जो भारत की महान विभूतियों की तपश्चर्या की दिव्य प्राण ऊर्जा से संबंधित एक पवित्र स्थल है, जहाँ मन, विचार और आत्मा की शांति प्राप्त होती है।
परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा 1971 में हरिद्वार में स्थापित शांतिकुंज, "हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा" के सूत्रपात के साथ राष्ट्र-निर्माण और जीवन जीने की कला सिखाने का एक अनूठा केंद्र है।
संस्थान के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य और उनकी अर्धांगिनी भगवती देवी शर्मा (गुरुदेव और माताजी) की सूक्ष्म उपस्थिति आज भी गायत्री परिजनों को शक्ति और संरक्षण प्रदान करती है।
शांतिकुंज में यज्ञ परंपरा को वैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत किया जाता है, जहाँ यज्ञ प्रयोगशाला में मंत्र शक्ति और ऊर्जा के प्रभावों पर शोध किया जाता है, जो अध्यात्म और विज्ञान के समन्वय का प्रतीक है।
गुरुदेव द्वारा 15 वर्ष की आयु में प्रज्वलित किया गया पवित्र अखंड दीप, जो 1956 से निरंतर प्रज्वलित है, विशाल गायत्री परिवार और 24 महापुरश्चरणों की आधारशिला है।
गुरुदेव ने 'विचार क्रांति अभियान' का सूत्रपात किया, जिसमें उनके साहित्य को जीवंत देव प्रतिमाएँ माना गया है, जो हर मनोस्थिति के लोगों का मार्गदर्शन कर उनकी समस्याओं का समाधान करती हैं।
1979 में स्थापित ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान, विज्ञान और अध्यात्म के पूरक संबंध को स्थापित करते हुए यज्ञ विज्ञान, मंत्र शक्ति और जैव विविधता पर महत्वपूर्ण शोध करता है।
देव संस्कृति विश्वविद्यालय की स्थापना 2002 में की गई, जिसका उद्देश्य केवल ज्ञानी नहीं, बल्कि उच्च चरित्रवान, कर्तव्यपरायण और मूल्यनिष्ठ छात्रों का निर्माण करना है, जो भारतीय संस्कृति के पुरातन स्वरूप को दर्शाते हैं।
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